DOHA 37

कामी क्रोधी लालची, इनसे भक्ति न होय।

भक्ति करे कोई सुरमा, जाती बरन कुल खोए।

MEANING

कबीर दास जी कहते हैं कि कामी, क्रोधी और लालची, ऐसे व्यक्तियों से भक्ति नहीं हो पाती। भक्ति तो कोई सूरमा ही कर सकता है जो अपनी जाति, कुल, अहंकार सबका त्याग कर देता है।