DOHA 139

जल में कुम्भ कुम्भ में जल है बाहर भीतर पानी।

फूटा कुम्भ जल जलहि समाना यह तथ कह्यौ गयानी।

MEANING

जब पानी भरने जाएं तो घडा जल में रहता है और भरने पर जल घड़े के अन्दर आ जाता है इस तरह देखें तो - बाहर और भीतर पानी ही रहता है - पानी की ही सत्ता है। जब घडा फूट जाए तो उसका जल जल में ही मिल जाता है - अलगाव नहीं रहता - ज्ञानी जन इस तथ्य को कह गए हैं! आत्मा-परमात्मा दो नहीं एक हैं - आत्मा परमात्मा में और परमात्मा आत्मा में विराजमान है। अंतत: परमात्मा की ही सत्ता है - जब देह विलीन होती है - वह परमात्मा का ही अंश हो जाती है - उसी में समा जाती है। एकाकार हो जाती है।