DOHA 51

अति का भला न बोलना, अति की भली न चूप,

अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप

MEANING

कबीरदास जी कहते हैं कि ज्यादा बोलना अच्छा नहीं है और ना ही ज्यादा चुप रहना भी अच्छा है जैसे ज्यादा बारिश अच्छी नहीं होती लेकिन बहुत ज्यादा धूप भी अच्छी नहीं है।